मेरी खुशी हो या मेरा गम तुमसे ही रूकता हूं तुम्हें ही मनाता हूं आजकल अजब से कशमकश में जिंदगी गुजर रही है तुमसे मुलाकात से पहले दिल में सुकून था जबसे मिली हो मेरे दिल का करार खो गया है मन बार-बार यह कहने लगा है तुमसे प्यार हो गया है मेरा दिल तुम्हारे प्यार में पागल हो चुका है अब इसे समझाना मुश्किल सा लग रहा है कभी फुर्सत मिले आकर मुलाकात कर लो मेरे मन की हकीकत से रूबरू हो जाओगी
Hindi shayari sangrah Manoj kumar